Thursday, 29 December 2016

भाभी जी नोटबंदी के समर्थन में !

29 दिसंबर, 2016

भारतीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने पिछले महीने 8 नवम्बर, 2016 की रात्रि में एक अभूतपूर्व निर्णय लिया। उस रात 12 बजे या फिर यूँ कहिये कि 9 नवम्बर, 2016 के जीरो ऑवर से 500 और 1000 रुपये के प्रचलित नोट को बंद करने की घोषणा की। जिसने सुना वही सन्न रह गया। इसकी आलोचना और प्रशंसा अभी तक चल रही है। लगभग पूरा देश ही इसके समर्थन और विरोध में बँट सा गया। न्यूज चैनल्स पर भी इस पर गंभीर बहस छिड़ गई। 

वैसे तो इंटरटेनमेंट चैनल्स या फिर किसी कार्यक्रम - सीरियल के प्रोड्यूसर्स को सिर्फ एडवर्टाइज से कमाई से मतलब होता है। चैनल्स सामाजिक सरोकार से लबरेज सन्देश को भी पैसा लेकर ही दिखाने के लिए चर्चित हैं। ऐसे में एक लोकप्रिय सीरियल ने भी अपनी तरफ से जन-जागरूकता दिखाने या फिर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी की भरपूर कोशिश की। &TV पर रात 10:30 बजे सोमवार से शनिवार तक एक सीरियल आता है। 

सही पकड़े हैं,  सीरियल का नाम "भाबी जी घर पर हैं" ही है। 2015 की शुरुआत में शुरू हुआ यह धारावाहिक आज अपनी लोकप्रियता के चरम पर है। सीरियल के किरदार "अंगूरी भाभी", "हप्पू सिंह", "टीका", "मलखान" आज घर घर में लोकप्रिय हैं। कुछ लोग इसको वयस्क कॉमेडी भी कहते हैं लेकिन "मनमोहन तिवारी" और "विभूति मिश्रा" की नोकझोंक सबको अच्छी लगती है। इस सीरियल ने लोगों के मनोरंजन की जिम्मेदारी तो अच्छे से उठा रखी ही है, पिछले दिनों इसने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का भी नमूना पेश किया। 

नोटबंदी की घोषणा के बाद से ही इसके एपिसोड्स में इसको लेकर जागरूकता फ़ैलाने की कोशिश की गई। लगभग एक हफ्ते तक इसकी कहानी में नोटबंदी ही छाया रहा। इसके किरदारों ने कहानी के माध्यम से नोटबंदी के प्रति जागरूकता फ़ैलाने की कोशिश की। जब मनमोहन तिवारी ने झूठ बोलकर अपने काले धन को अनीता जी के माध्यम से सफ़ेद करने की कोशिश की तो अनीता जी ने उनको खूब डाँट लगाई। 

जब झूठ बोलकर हप्पू सिंह और तिवारी जी ने अपने काले धन को छापे मारी से बचाने के लिए अनीता जी के घर में छुपाने की कोशिश की तब भी उनकी एक नहीं चली। अनीता जी ने काले धन रखने पर होने वाली परेशानी के बारे में भी बताया। जब टीका और मलखान अपने पैसे बदलवाने जाते हैं तो चौकीदार ने उनको अपना पैन कार्ड लाने को कहा। 

कुल मिलाकर इस सीरियल ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। नोटबंदी कितना सफल या असफल रहा ये अलग चर्चा का विषय है। 




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