Wednesday, 19 October 2016

मनीष सिसोदिया के प्रयास से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार।


19 अक्टूबर, 2016

आम आदमी पार्टी द्वारा दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं। लेकिन अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की जोड़ी ने दिल्ली में सुशासन और प्रगति की ऐसी अमिट छाप छोड़ी है कि जनमानस इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहा है। केजरीवाल जी के कामों की चर्चा तो हमेशा होती ही रहती हैं, लेकिन दिल्ली के शिक्षा मंत्री के रूप में मनीष सिसोदिया जी ने जो कार्य किए हैं वो भी कम प्रशंसनीय नहीं है। जनता को इसके बारे में बताने की जरुरत है। 

दिल्ली के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल्स और टीचर्स की ट्रेनिंग कैम्ब्रिज, हार्वर्ड, आई आई एम जैसे प्रतिष्टित संस्थानों में कराई जा रही है। कुछ शिक्षक ट्रेनिंग के लिए सिंगापूर भी भेजे जा रहे हैं। इससे शिक्षा एवं शिक्षण के स्तर में व्यापक सुधार होने की आशा है। स्कूलों के प्रिंसिपल्स के वित्तीय अधिकार भी बढ़ा दिए गए हैं। स्कूल की बेहतरी से जुड़े अधिकतर मामलों में निर्णय लेने का अधिकार प्रिंसिपल्स को दिए गए हैं। 

कमरों की कमी के कारण एक ही क्लास में क्षमता से ज्यादा बच्चों को बिठाना पड़ता था। एक स्कूल में तो एक दिन बीच करके क्लास लगती थी। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 8,000 नए क्लासरूम बनाने का काम पूरा होने ही वाला है। इसके अलावा 8,000 और नए क्लासरूम बनाने की मंजूरी दे दी गई है। 500 नए स्कूल बनाने के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में 40 नए स्कूल की बिल्डिंग बनाने का काम अपने अंतिम चरण में है। इन स्कूलों की बिल्डिंग, प्राइवेट स्कूलों से भी ज्यादा अच्छे हैं। दो शिफ्ट में चलाए जाने की स्थिति में, इन 80 स्कूलों में पठन - पाठन कार्य जल्दी ही शुरू हो जायेगा। 

स्कूलों और अभिभावकों में समन्वय बढ़ाने के लिये प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर पीटीएम का आयोजन किया जा रहा है। इसी वर्ष जुलाई में और अभी 15 अक्टूबर को मेगा पीटीएम का आयोजन किया गया। इसमें अभिभावक बेझिझक अपने बच्चों की प्रगति के बारे में वर्ग शिक्षक एवं अन्य शिक्षकों से बात करते हैं और प्रश्न पूछते हैं। शिक्षकों को भी छात्रों के बारे मं उनके अभिभावकों से बात करने का मौका मिलता है। 

दिल्ली के 54 स्कूलों को चुनकर इसमें किसी भी प्राइवेट स्कूल से ज्यादा सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। अब दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों में इस प्रयोग को क्रियान्वित किये जाने की बात की जा रही है। स्कूलों में हर तरह की सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए एस्टेट मैनजेर की नियुक्ति की गई है। इसका काम स्कूल की देखरेख, सुरक्षा, सफाई, पानी आदि की व्यवस्था को सुनिश्चित करना है। अब स्कूल के प्रिंसिपल्स पर इसकी जिम्मेदारी न होने की वजह से वो अध्यापन कार्य पर ज्यादा ध्यान दे पाते हैं। 
अब शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्य में नहीं लगाया जाता और पूरा समय उनसे पढ़ाई ही करवाया जाता है। इससे शिक्षा के स्तर में भी गुणात्मक परिवर्तन आया है। पहले अन्य कार्यों में लगे रहने के कारण शिक्षण में कम ध्यान एवं समय दे पाते थे शिक्षकगण। विद्यालय प्रबंधन समिति को अब पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है। इसमें अभिभावकों को भी शामिल किया गया है। अब इनको पहले से ज्यादा अधिकार भी दिए गए हैं। स्कूल में हो रहे अध्यापन कार्य, वहाँ उपलब्ध सुविधा की भी जाँच करने का अधिकार है, अब विद्यालय प्रबंधन समिति को। अब इसके सदस्य स्कूल के कार्यों में खूब बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने लगे हैं।

स्कूलों में साफ-सफाई की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए हर स्कूल में कम से कम 4 सफाई कर्मचारी रखे गए हैं। इसका मतलब कि एक बिल्डिंग में 8 सफाई कर्मचारी काम करते हैं। इससे स्कूलों में गंदगी नहीं रहती है। समय-समय पर शिक्षामंत्री जी स्कूलों का औचक निरीक्षण भी करते रहते हैं और कमी पाए जाने पर आवश्यक दिशा-निर्देश देते हैं। अगर स्थिति ज्यादा ही ख़राब हुई तो सम्बंधित अधिकारी और कर्मचारी को दंड देने से भी परहेज नहीं करते। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही में बहुत कमी आई है।

इन सब कार्यों से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर में बहुत ज्यादा सुधार देखने को मिल रहा है। मनीष सिसोदिया जी अगर ऐसे ही मन लगाकर काम करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब लोग प्राइवेट स्कूलों में ली जाने वाली भारी भरकम फ़ीस से आजिज आकर, सरकारी स्कूलों में ही अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद करेंगे।

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